भारत में जलवायु|Climate of india in Hindi

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भारत में जलवायु|Climate of india in Hindi

Climate of india in Hindi .किसी क्षेत्र में लम्बे समय तक मौसम की जो स्थिति होती हैं, उसे उस स्थान की जलवायु कहते हैं। भारत की जलवायु उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु हैं।

  • इसी स्थान पर कुछ समय के लिए जैसे एक दिन या एक सप्ताह के लिए वायु मंडलीय अवस्थाओं को वहां का मौसम कहते हैं।
  • मानसून शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के मौसिम शब्द से हुई हैं जिसका अर्थ हैं –पवनों की दिशा का मौसम के अनुसार पलट जाना। 
  • अत्यधिक प्रादेशिक भिन्नता, भारतीय जलवायु की विशेषता हैं। जहाँ उत्तर-पूर्व में भारी वर्षा होने के कारण वहां आद्रता अधिक हैं। वहीं दूसरी ओर पश्चिमी राजस्थान बहुत कम वर्षा के कारण शुष्क क्षेत्र हैं।
  • भारतीय जलवायु को मानसून के आलावा प्रभावित करने वाले दो प्रमुख कारक हैं।
  1. उत्तर में हिमालय पर्वत: उत्तर में हिमालय पर्वत होने के कारण एशिया से आने वाली ठंडी हवाएं भारत में नहीं आ पाती हैं।
  2. दक्षिण में हिन्द महासागर: दक्षिण में हिंदमहासागर तथा भूमध्य रेखा नजदीक होने के कारण भारत की जलवायु उष्णकटिबंधीय जलवायु के समरूप हैं।
  • भारतीय मौसम विभाग ने भारत की जलवायु को चार भागों में विभक्त किया हैं –
  1. शीत ऋतु– दिसंबर से फरवरी
  2. ग्रीष्म ऋतु– मार्च से मई
  3. दक्षिण पश्चिम मानसून की ऋतु-जून से सितम्बर
  4. पीछे हटते मानसून की ऋतु -अक्तूबर और नवम्बर
  • शीत ऋतु- दिसंबर से फरवरी – इस समय सूर्य के दक्षिणायन होने के कारण पश्चिमोत्तर भारत में उच्च दाब का क्षेत्र बन जाता हैं। तब पवन का प्रवाह उत्तर -पश्चिम से पूर्व की ओर होने लगता हैं।  जिससे पूर्वी तटीय भाग में उत्तर-पूर्वी पवनों के प्रभाव से वर्षा होती हैं। इस समय मुख्य रूप से भूमध्य सागरीय पश्चिमी विक्षोभों से वर्षा प्राप्त होती हैं।
  • इस पश्चिमी विक्षोब या जेट स्ट्रीम से होने वाली सर्द कालीन वर्षा से पंजाब और हरियाणा में गेहूँ, चना सरसों की कृषि के लिए बहुत उपयोगी हैं। हिमाचल में सेब के बागानों के लिए बहुत ही उपयोगी रहती हैं।
  • राजस्थान में इस वर्षा को मावट कहते हैं।
  • हिमालय क्षेत्र में इससे हिमपात होता है; जिसके कारण उनके पिघलने से हमें वर्ष भर नदियों में पानी मिलता रहता हैं।
  • ग्रीष्म ऋतु- मार्च से मई: इस समय सूर्य उत्तरायण में होने के कारण यहाँ तापमान अधिक रहता हैं।  जिससे यहाँ पर वायु का दबाव कम हो जाता हैं। इस समय तापमान कुछ स्थानों पर तो 45 °C से अधिक हो जाता हैं।
  • दक्षिण पूर्व से आने वाली आद्र समुद्री हवाएं जब जब धूल भरी शुष्क हवाओं से मिलती हैं ,तो तूफान, तड़ित झंझा (thunder storm) के साथ मानसून से पूर्व की बारिश होती है। जो की औसत वार्षिक वर्ष का लगभग 10 % होती है। विभिन्न भागों में इस वर्षा को अलग -अलग नामों से जाना जाता हैं।
  • आसाम में इसे चाय वर्षा (Tea Shower), केरल में इसे आम्र वर्षा (Mango Shower), कर्नाटक में इसे कॉफ़ी वर्षा (Coffee Shower) एवं चेरी ब्लासम तथा उड़ीसा में इसे नार्वेस्टर भी कहा जाता हैं।
  • बंगाल में इसे काल बैशाखी कहा जाता हैं।

दक्षिण पश्चिम मानसून की ऋतु: इस समय ग्रीष्म ऋतु में उत्तर -पश्चिम भारत में बना निम्न वायु दाब का क्षेत्र अधिक तीव्र होता हैं। इसका विस्तार पश्चिम में राजस्थान से लेकर पश्चिमी बंगाल तक रहता हैं। इस निम्न वायु दाब की कमी को पूरा करने के लिए बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से हवा खिचीं चली आती हैं जो की यहाँ से अधिक वायु दाब का क्षेत्र हैं।

दक्षिणी गोलार्द्ध की दक्षिण पूर्वी व्यापारिक पवनें भारत के ऊपर के इस वायु संचरण में भूमध्य रेखा को पार करके दक्षिण पश्चिम पवनों से मिल जाती हैं। जिससे जून के प्रथम सप्ताह में केरल के तट पर ये दक्षिण पश्चिम मानसून के रूप में फट जाती हैं और महीने के अंत तक मानसून पूरे भारत में सक्रिय हो जाता हैं।

  • भारत की प्रायद्वीपीय आकृति के कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून दो भागों में विभक्त हो जाता हो जाता हैं।
  1. अरब सागर की शाखा
  2. बंगाल की खाड़ी की शाखा

  • अरब सागर शाखा का मानसून सबसे पहले भारत के केरल राज्य में जून के प्रथम सप्ताह में आता हैं। यहाँ पर यह पश्चिमी घाट पर्वत से टकराकर केरल के तटों पर वर्षा करता हैं| इसे मानसून प्रस्फोट (Monsoon burst) कहा जाता हैं।
  • बंगाल की खाड़ी से आने वाली हवाओं के कारण गारो, खासी एवं जयंतिया की पहाड़ियों में अधिक वर्षा होती हैं। इसके कारण ही मानिसराम(मेघालय) विश्व का सबसे अधिक वर्षा वाला स्थान हैं।
  • मानसून की अरब सागर शाखा तुलनात्मक रूप से अधिक शक्तिशाली होती हैं। दक्षिण-पश्चिम मानसून द्वारा लाई गई कुल आद्रता 65% भाग अरब सागर से तथा 35% भाग बंगाल की खाड़ी से आता हैं।
  • अरब सागर मानसून के एक शाखा सिंध नदी के डेल्टा क्षेत्र से आगे बढ़कर राजस्थान के मरुस्थल से होती हुई सीधे हिमालय पर्वत से टकराती हैं। जिससे धर्मशाला के निकट भारी वर्षा होती हैं। राजस्थान में मार्ग में अवरोध न होने के कारण क्योकि अरावली पर्वतमाला इनके बहने की दिशा के समानांतर पड़ती हैं।  इसलिए राजस्थान में बारिश नहीं होती हैं।

  • तमिलनाडु पश्चिमी घाट के पर्वत वृष्टि छाया क्षेत्र में पड़ता हैं अत: यहाँ दक्षिण-पश्चिम मानसून द्वारा काफी कम वर्षा होती हैं।
  • पीछे हटते मानसून की ऋतु -अक्तूबर और नवम्बर।  इस समय सूर्य दक्षिण की ओर जाने लगता हैं जिससे उत्तर में तापमान कम और दाब अधिक होने लगता है।  अब ये कम दाब का क्षेत्र बंगाल की खाड़ी में बनने लगता हैं।
  • इस ऋतु में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में चक्रवातों की उत्पत्ति होती हैं।  इन चक्रवातों से आंध्र प्रदेश व उड़ीसा के पूर्वी तटीय क्षेत्र तथा पश्चिम तटीय क्षेत्र गुजरात में काफी क्षति होती हैं।
  • इन चक्रवातों के कारण ही गोदावरी,कृष्णा और कावेरी के डेल्टाई क्षेत्रो में भारी बारिश होती हैं।

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