Main Lakes of the world विश्व की प्रमुख झीलें

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पृथ्वी के धरातल के मध्य में स्थित जलीय भाग को झील कहते हैं। झीलों के आकार में पर्याप्त विविधता पाई जाती हैं। कुछ झीलें आकार में छोटी है तो कुछ झीलें आकार में इतनी बड़ी हैं की उन्हें सागर के रूप में जाना जाता हैं जैसे -कैस्पियन सागर।

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झीलों का विस्तार भूमध्य रेखा से धुर्वों तक फैला हुआ हैं। विश्व की अधिकांश झीलें हिमानी द्वारा निर्मित हैं। इसीलिए ये उच्च अक्षांशो और ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रो में अधिक पाई जाती हैं।

मुख्यत: झीलों का वर्गीकरण हम निम्न प्रकार से करते हैं :

  1. बनावट के आधार पर
  2. जल की प्रकृति के आधार पर
  3. उत्पत्ति के आधार पर

बनावट के आधार पर झीलें दो प्रकार की होती हैं –

प्राकृतिक झीलें (Natural Lakes): भूगर्भिक हलचलों या बहिर्जात बलों के कारण स्वम निर्मित झीलों को इस श्रेणी में रक्खा जाता हैं। डल, वुलर, मानसरोवर, राकसताल आदि भारतीय उपमहाद्वीप की प्राकृतिक झीलें हैं।

कृत्रिम झीलें (Artificial Lakes): इन झीलों का निर्माण मानव अपनी सुविधा या उपयोग के लिए करता हैं। अक्सर इन झीलों का निर्माण नदियों के बहाव के बहाव में बाँध बनाकर किया जाता हैं। इस प्रकार की झीलों के कुछ प्रमुख उदाहरण निम्न प्रकार हैं – गोविन्द सागर झील (भाखड़ा बाँध), चम्बल नदी पर गाँधी सागर झील, राजस्थान की जयसमंद, राजसमंद एवं पिछौला झीलें इस प्रकार की झीलें हैं।

जल की प्रकृति के आधार पर झीलें दो प्रकार की होती हैं –

मीठे या ताजे पानी की झील : इस प्रकार की झीलों में झीलों में नदियों के माध्यम से ताजे पानी का प्रवाह निरंतर होता रहता हैं। वहां लवणों का जमाव नहीं हो पाता हैं। जिससे उनका जल मीठा होता हैं।

इस प्रकार की झीलें पर्वतीय भागों में तथा शीतोष्ण प्रदेशों में अधिक पाई जाती हैं क्योकिं वहां पर वाष्पीकरण बहुत कम होता हैं। मीठे के पानी की कुछ प्रमुख झीलें – बैकाल झील (एशिया), जेनेवा (यूरोप), टिटिकाका ( दक्षिण अमेरिका), भारत की मीठे झीलें हैं – नैनीताल, सातताल, भीमताल आदि

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